महत्व (Significance)
- Kal Bhairav Chalisa: काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक रूप माना जाता है।
- इनकी उपासना से भय, नकारात्मक ऊर्जा, और बाधाओं का नाश होता है।
- विशेष रूप से काल भैरव अष्टमी के दिन इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Kal Bhairav Chalisa पाठ के लाभ
- भय और तनाव से मुक्ति
- शत्रुओं से रक्षा
- अचानक आने वाली समस्याओं का समाधान
- आत्मबल और साहस में वृद्धि
Kal Bhairav Chalisa
काल भैरव चालीसा (Kaal Bhairav Chalisa)
भगवान काल भैरव, जो भगवान शिव के उग्र स्वरूप माने जाते हैं, उनकी कृपा पाने के लिए यह चालीसा बहुत प्रभावशाली मानी जाती है।
दोहा
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥
चालीसा
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत संतन्ह प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके।
कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये।
मुंडमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
Kal Bhairav Chalisa
नंदी गणेश सोहै तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुःख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहि जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ।
लव निमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहि कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदा ही॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहि पाई॥
प्रकट उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए बिहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई।
नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंका विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहि पुरारी॥
Kal Bhairav Chalisa
एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चह सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमित रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
मात पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहीं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शंभु सहाई॥
ऋणिया जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पंडित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करे हमेशा।
तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे।
अंतवास शिवपुर में पावे॥
कहत अयोध्या दास आस तुम्हारी।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
दोहा
नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीसा॥
✨ महत्व (Significance)
- यह चालीसा विशेष रूप से काल भैरव अष्टमी के दिन पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से रक्षा होती है।
- जीवन में साहस, शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है।
Significance of Kaal Bhairav
Kaal Bhairav is a powerful and fierce manifestation of Lord Shiva, symbolizing time (Kaal), protection, and destruction of evil. His significance in Hindu tradition is deep and spiritually meaningful:
1. Guardian of Time and Karma
Kaal Bhairav represents time and its ultimate control over life. Devotees believe that worshipping him helps in:
- Removing past karmic burdens
- Gaining discipline and control over life
2. Protector from Negative Energies
He is known as the ultimate protector who guards devotees from:
- Evil forces
- Black magic and negative influences
- Fear and anxiety
3. Destroyer of Ego and Evil
Kaal Bhairav teaches the importance of humility. According to mythology, he destroyed ego and wrongdoing, reminding devotees to:
- Stay grounded
- Follow the path of righteousness
4. Symbol of Justice and Discipline
- No one can stay in Varanasi without his permission
- He maintains divine law and order
Kal Bhairav Chalisa
5. Importance on Kaal Bhairav Ashtami
This day marks his appearance (manifestation). Worship on this day:
- Removes obstacles and fear
- Brings courage, protection, and spiritual growth
6. Spiritual Growth and Inner Strength
Regular chanting of Bhairav Chalisa or mantra helps in:
- Increasing focus and confidence
- Awakening inner strength
- Protecting the devotee’s spiritual journey
Kaal Bhairav is not just a fierce deity—he is a divine protector, time keeper, and remover of fear, guiding devotees toward a fearless and disciplined life.



